साधारण-सी बात मानकर आमतौर पर जुकाम पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता, लेकिन यह किसी बड़ी बीमारी का संकेत भी हो सकता है। बेहतर है कि नाजुक हालात बनने से पहले ही जुकाम का काम तमाम कर दिया जाए। जुकाम कैसे होता है और इसमें राहत के लिए कौन-कौन से कारगर तरीके है
क्या है जुकाम
जुकाम एक तरह की एलर्जी है, जिसमें नाक से पानी या बलगम निकलता है। जुकाम में हमारे श्वसन तंत्र में पस सेल्स और पानी का मिश्रण बन जाता है और इसी का नाक और गले के माध्यम से सीक्रेशन होने लगता है। जुकाम अपने आप में कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह इस बात का लक्षण है कि श्वसन तंत्र में एलर्जी या इन्फेक्शन हो चुका है और निमोनिया और यूआरआई जैसी दूसरी बीमारियां हो सकती हैं।
कैसे होता है
जुकाम आमतौर पर दो तरीके से होता है :
1. हवा में मौजूद बैक्टीरिया या वायरस जब कभी सांस के जरिए शरीर में प्रवेश करते हैं, तो एलर्जी हो जाती है। नतीजा यह होता है कि पानी वाले या रेशेदार सीक्रेशंस नाक से बाहर आने लगते हैं। ये बैक्टीरिया सांस लेने के सिस्टम में भी इन्फेक्शन कर देते हैं।
2. हमारे गले में दो तरह के बैक्टीरिया मौजूद होते हैं - कुछ अच्छे और कुछ बुरे। कभी-कभी सर्दी-गर्मी बढ़ने, एकदम ठंडा-गर्म खाने, ठंडे से गर्म व गर्म से ठंडे माहौल में जाने, ठंडा पानी ज्यादा पीने या बारिश में भीगने से गले के बुरे बैक्टीरिया स्टिमुलेट हो जाते हैं। ये बैक्टीरिया ही गले में इन्फेक्शन कर देते हैं और जुकाम की वजह बनते हैं।
कुछ डॉक्टरों का कहना है कि सर्दी-गर्मी बढ़ने, एकदम ठंडा-गर्म खाने, ठंडे से गर्म व गर्म से ठंडे माहौल में जाने, ठंडा पानी ज्यादा पीने या बारिश में भीगने से सीधे जुकाम नहीं होता। जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, उन्हीं को ऐसा होने पर जुकाम होता है। दूसरे डॉक्टर मानते हैं कि रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के अलावा ऊपर दिए गए सभी पॉइंट्स भी जुकाम के लिए जिम्मेदार हैं। प्रदूषण की वजह से भी जुकाम हो सकता है, लेकिन ज्यादा नहाने से जुकाम नहीं होता।
कौन है निशाने पर
- जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो।
- बच्चे, बूढ़े, शुगर, हाई बीपी, टीबी, दमा, हार्ट, एचआईवी, एड्स, हेपटाइटिस व एनीमिया के मरीजों के अलावा कुपोषण के शिकार लोगों को जुकाम जल्दी हो जाता है।
- जिन लोगों का शरीर सेंसिटिव है या जल्दी एलजीर्होने की टेंडेंसी है, उन्हें जुकाम जल्दी पकड़ सकता है।
पहचानें जुकाम के संकेत
- पतला हो और सफेद पानी निकले तो समझें कि हल्का और सामान्य जुकाम है। ज्यादा फिक्र की जरूरत नहीं है।
- गाढ़ा हो तो समझें कि इन्फेक्शन ज्यादा हो गया है। डॉक्टर को दिखाएं।
- नाक बंद हो तो वायरल व बैक्टीरियल दोनों तरह के इन्फेक्शन हो सकते हैं। वायरल इन्फेक्शन है तो स्टीम और एंटी-एलर्जिक दवा से ठीक हो जाएगा, नहीं तो एंटीबायोटिक्स लेनी होंगी।
- सफेद रेशा हो तो एलर्जी की निशानी है। यह साधारण जुकाम होता है।
- हरा रेशा हो, तो इन्फेक्शन है। समझें कि बात बढ़ रही है और तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
- पीला और गाढ़ा रेशा हो तो भी इन्फेक्शन है। अपने आप इलाज न करें और डॉक्टर को दिखाएं।
- जुकाम को पांच दिन से ज्यादा हो जाएं या साथ में खांसी, बलगम, बदन दर्द व बुखार भी हो, तो समझना चाहिए कि आम जुकाम नहीं है।
- अगर पीला रेशा व सांस की दिक्कत के साथ बुखार भी हो तो बैक्टीरियल इन्फेक्शन होता है। ऐसे में डॉक्टर के पास जाना चाहिए। अगर जुकाम बैक्टीरिया से है तो एंटीबायोटिक खाने पर ठीक होता है। यह सिर्फ डॉक्टर ही देखकर बताएगा।
- कफ के साथ खून भी आए तो खतरनाक है। टीबी का लक्षण हो सकता है। फौरन डॉक्टर को दिखाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले कुछ सवाल
आम जुकाम कितने दिन रहता है?
यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर निर्भर करता है। किसी का दो-तीन में ठीक हो जाता है तो किसी का चार-पांच दिन में। किसी को दस दिन भी लग सकते हैं।
बच्चों को जुकाम हो तो क्या करें?
गोदी में बिठाकर थोड़ी-सी भाप दें। एंटी-एलर्जिक सीरप दें। बच्चे नाजुक होते हैं इसलिए बेहतर यही है कि उनका इलाज डॉक्टर से ही कराएं।
स्टीम लेने का सही तरीका क्या है?
स्टीम या तो स्टीमर से ले सकते हैं या फिर किसी बड़े बर्तन में पानी तेज गर्म करके भाप ले सकते हैं। भाप लेने से पहले सिर को तौलिए से ढक लें और जितनी देर बर्दाश्त हो, भाप लें।
क्या भाप में विक्स आदि डालें?
विक्स आदि डाल सकते हैं। इसके अलावा टिंक्चर बेंजॉइन के क्रिस्टल्स या मेंथॉल की बूंदें भी डाल सकते हैं। शुगर, बीपी, हार्ट व एनीमिया के मरीज और बच्चे भी भाप ले सकते हैं।
जुकाम में दवा से लेने से क्या कोई फर्क पड़ता है?
जुकाम अपने आप ही ठीक हो जाता है। दवा सिर्फ थोड़ा आराम दिलाती है। वायरल वाले बुखार में एंटी-एलर्जिक दवा से बहती नाक की स्थिति कुछ सुधार जाती है लेकिन जुकाम पांच दिन तो चलता ही है।
क्या कोल्ड्रिन, विनकोल्ड, एविल, डीकोल्ड या दूसरी ओटीसी दवाएं (जिन दवाओं के लिए डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन की जरूरत नहीं होती या जिनके ऐड आते हैं) लेनी चाहिए? इनके नुकसान क्या हैं?
ये एंटी-एलर्जिक दवाएं होती हैं। ये ज्यादा फायदेमंद नहीं हैं। बिना डॉक्टर से पूछे कोई भी दवा नुकसान कर सकती है। एकाध दिन के लिए इन्हें लिया जा सकता है, पर आराम न आने पर डॉक्टर को जरूर दिखाएं। एंटी-एलर्जिक होने के कारण इन दवाओं से ड्राइनेस व सुस्ती आ जाती है। इन्हें लेने के बाद रेशा सूखता है। ऐसे में नाक सूख जाने से कभी-कभी दिक्कत भी हो सकती है।
क्या कफ सीरप, खांसी की गोलियां जैसे विक्स, हॉल्स आदि सेफ हैं?
ये गोलियां सेफ हैं। इनसे कोई नुकसान नहीं है। कफ सीरप भी लिए जा सकते हैं, पर इनसे सुस्ती आ जाती है।
आराम के लिए आजमाएं ये तरीके
1. एलोपैथी
- सिट्राजिन, क्लोरफेनरामिन, फ्लेक्सोसेनाडीन जैसी दवाएं ली जा सकती हैं।
2. होम्योपैथी
जुकाम सर्दियों की बजाय गर्मियों में ज्यादा होता है, क्योंकि गमिर्यों में गर्म से ठंडे व ठंडे से गर्म माहौल में लगातार आना-जाना होता है। इनमें से कोई एक तरीका इस्तेमाल करें :
बरसाती जुकाम में : इनमें से किसी एक की पांच-पांच बूंदें दिन में तीन बार लें :
- रसटॉक्स 30
- डल्कामारा 30
- नेट्रम सल्फ 30
एलर्जी से होने वाले जुकाम में : एलर्जी धूल, सेंट, टेलकम पाउडर, साबुन या प्रदूषण से हो सकती है। इसके लक्षण हैं - अचानक छींकें, नाक-आंख से पानी आना व गले में खराश होना। आजकल जुकाम की सबसे कॉमन वजह एलर्जी होती है। इसमें इन दवाओं में से किसी एक की पांच-पांच बूंदें दिन में तीन बार ले सकते हैं :
- एलियम सीपा 30
- बैलाडोना 30
- यूफ्रेशिया 30
- नक्सवोमिका 30
- साबाडीला 30
सर्द-गर्म से होने वाला जुकाम : इसमें से किसी एक की पांच-पांच बूंदें दिन में तीन बार लें :
- ब्रायोनिया 30
- हीपर सल्फ 30
- सेंगुनेरिया 30
सर्दी से होने वाला जुकाम : इनमें से किसी एक की पांच-पांच बूंदें दिन में तीन बार ले सकते हैं :
- एकोनाइट 30
- स्टिक्टा 30
3. आयुर्वेद
-एस्टोमैप की एक-एक टेबलेट दिन में तीन बार लें। साथ ही प्राणधारा की दो बूंद भी एक चम्मच गर्म पानी से तीन बार ले सकते हैं।
-हिमालय की सेप्टिलिन गोली दो या तीन बार गर्म पानी से लें।
-लक्ष्मीविलास रस की एक-एक गोली सुबह-शाम लें। हाई बीपी वाले आधी गोली लें।
-सितोपलादि चूर्ण आधा-आधा चम्मच दिन में तीन बार लें। पानी, दूध या शहद से ले सकते हैं।
-हमदर्द का जोशीना गर्म पानी में मिलाकर लें।
-जुशांदा चाय की तरह उबालकर गर्म-गर्म लें।
-अग्निकुमार रस की एक-एक गोली सुबह-शाम दूध या पानी से लें।
-आधा चम्मच चोपचीनादि चूर्ण सुबह व शाम दूध या गर्म पानी से लें।
-बहुत ज्यादा जुकाम होने पर श्रृंगादि भस्म डॉक्टर से पूछकर लें। यह चमत्कार की तरह काम करती है।
-सुबह नहाने से पहले नाक अच्छी तरह साफ करके उंगली से एक, दो बूंद सरसों का तेल लगाएं। नहाने के बाद फिर नाक साफ करें। आयुर्वेद में इसे नस्य कहा जाता है। इससे नजला-जुकाम दूर होता है। साथ ही स्मरणशक्ति, बुद्धि और नेत्र ज्योति बढ़ती है।
4. घरेलू नुस्खे
-तुलसी और अदरक का रस मिला लें। इसकी आधे से एक चम्मच मात्रा लेकर थोड़ा गर्म कर लें। जब यह ठंडा हो जाए तो इसमें आधा चम्मच शहद मिला लें और दिन में तीन बार लें। शुगर वाले लोग सिर्फ एक बूंद शहद मिलाएं।
-काली मिर्च पाउडर दो चुटकी, हल्दी पाउडर दो चुटकी, सौंठ पाउडर दो चुटकी, लौंग का पाउडर एक चुटकी और बड़ी इलायची आधी चुटकी। इन सबको एक गिलास दूध में डालकर उबाल लें। इस दूध में मिश्री मिलाकर पीने से जुकाम ठीक हो जाता है। शुगर वाले मिश्री की जगह स्टीविया तुलसी का पाउडर मिला लें। यह बिना शुगर बढ़ाए मीठा स्वाद देता है। हाई बीपी व दिल के मरीज भी ले सकते हैं।
-एक बड़ी इलायची पीसकर उसमें चुटकी भर हल्दी व चुटकी भर काली मिर्च मिला लें। इसे शहद, मलाई या पानी से लें।
-आधा चम्मच सौंठ में चार दाने काली मिर्च के पीसकर मिला लें। इस पाउडर को शहद मिलाकर दिन में तीन-चार बार चाटें।
-अदरक का रस निकालकर शहद के साथ हल्का गर्म करके लें।
- काले जीरे को हल्का भूनकर सूंघने से नाक खुल जाती है।
-पाव भर दूध में दस-बारह काली मिर्च व दो-तीन बालियां केसर की मिला लें। इसके बाद मिश्री मिलाकर दूध लें।
-तुलसी के दस-पंद्रह पत्ते धोकर आधी कटोरी पानी में दो-चार घंटे रख दें। तुलसी का असर उसमें आ जाएगा। इस पानी को पी लें। दिन में दो-तीन बार ऐसा करें।
-खसखस के दाने दो-तीन छोटे चम्मच और चार काली मिर्च को पीसकर मिला लें। इसे दूध में अच्छी तरह उबालकर पीने से फायदा होता है।
-तुलसी और अदरक की चाय लें।
-चाय के साथ आधी चम्मच हल्दी लें।
-सौंठ, मुलहटी, काली मिर्च व पीपली का पाउडर बना लें। चौथाई चम्मच से जरा कम शहद मिलाकर दिन में दो बार चाटें। शुगर वाले इसे मलाई से लें।
- 50 ग्राम भुने चने, 20 ग्राम कलौंजी व 10 ग्राम पनवाड़ी वाले चूने को पोटली में बांध लें। इसे तवे पर गम करके रात को बार-बार सूंघें। इसे किसी भी मौसम में किया जा सकता है। चूना व कलौंजी न मिलने पर सिर्फ चने भी सूंघ सकते हैं।
- आधा चम्मच हल्दी गर्म कर लें। इसे एक चम्मच शहद में मिलाएं और शाम या रात को लें। एक घंटे तक पानी न पीएं। मौसमी जुकाम में यह बेहतर है। शुगर के पेशंट शहद की जगह दूध या गर्म पानी में हल्दी डाल लें।
- एक चम्मच हल्दी को तवे पर गर्म करके उसका धुआं लें। आराम आ जाएगा। दिन में दो बार कर सकते हैं।
- 50 ग्राम अदरक को पानी में उबालकर उसकी भाप लें। उस गर्म पानी में तौलिया भिगोकर छाती पर रखकर सिकाई भी कर सकते हैं।
-एक तौला अदरक पीसकर भून लें। इसमें एक तौला गुड़ मिलाकर रात को खा लें। ऊपर से पानी न पीएं। दो-तीन दिन में आराम आ जाएगा।
(नोट : इन उपायों में से कोई एक करें।)
5. नेजल ड्रॉप्स
-नाक बंद होने पर भाप लें। भाप के पानी में अमृतधारा, विक्स या नीलगिरी का तेल डाल लें।
-सादे पानी या नमक वाले पानी की भाप भी ले सकते हैं।
-अनुतेल नाम के तेल को छोटी उंगली से नाक में लगाकर सूंघें और लंबी-गहरी सांसें लें।
-षड्बिंदु तेल की दो-दो बूंदें दोनों नथुनों में दिन में कभी भी डाल लें, पर इसकी आदत न बनाएं।
- ऐलोपैथिक नेजल ड्रॉप्स नेजीवियॉन, ऑट्रिविन ड्रॉप्स या एजेप और नेजो क्लियर जैसे नेजल स्प्रे डाल सकते हैं। हालांकि डॉक्टर से पूछकर ही डालें क्योंकि कई बार ये नाक के ब्लॉकेज को बढ़ा भी सकते हैं।
6. ये करें
- तालू में गंदा पानी भर जाने से भी जुकाम हो जाता है। सुबह मुंह साफ करते वक्त अंगूठे से तालू को हल्का दबाएं। यह क्रिया बैठकर करें। तालू को सीधे हाथ के अंगूठे से साफ करें।
-कपड़े पहनकर सोएं, खासकर कूलर और एसी के सामने।
-एलर्जी से जुकाम हो तो पुरानी चीजें जैसे पुरानी किताबें, अलमारियां, काफी समय से न पहने गए कपड़े और कालीन साफ करके रखें। इनमें बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं।
-पानी घूंट-घूंट करके पीएं। इससे कफ नहीं बढ़ता।
-जुकाम व फ्लू का इंफेक्शन होने पर घर में कपूर और गुगुलू जलाएं। इसके धुएं से घर का वातावरण शुद्ध होता है और वायरस दूर हो जाता है।
7. ये न करें
-सुबह के वक्त बिस्तर से उठकर नंगे पैर न चलें।
- ठंडी चीजें जैसे दही, चावल, ठंडा पानी, आइसक्रीम, केला, चॉकलेट और दूध नहीं लें। फ्रिज में रखी चीजें व ज्यादा मीठा न लें।
-ठंडे से गर्म व गर्म से एकदम ठंडे वातावरण में न जाएं।
8. योग
इन यौगिक क्रियाओं को करने से जुकाम कंट्रोल होता है :
-कुंजल क्रिया, जलनेति, कपालभाति, महावीर आसन, सूर्य नमस्कार, उत्तानपादासन, लेटकर साइकल चलाने की क्रिया, धनुरासन व भस्त्रिका प्राणायाम।
9. मुद्रा
मुद्राओं का इस्तेमाल 1-45 मिनट तक किया जा सकता है।
- लिंग मुद्रा व प्राण मुद्रा।
- हाथों व पैरों की उंगलियों के टिप्स या नोक (नाखून नहीं, बिल्कुल अग्रभाग) दबाने से जुकाम जल्दी ठीक हो जाता है।
10. एक्यूप्रेशर
एसपी 6 : यह पॉइंट टखने के अंदर की तरफ चार उंगली ऊपर हड्डी के साथ है।
डीयू 20 : दोनों कानों पर अंगूठा रखें और सिर के ऊपर दोनों तरफ से मध्यमा उंगली लाकर दोनों को मिला दें। जहां दोनों उंगलियां मिलीं, वही पॉइंट है।
एक्स्ट्रा 1 या एक्स 1 : दोनों भौहों के बीच में, जहां महिलाएं बिंदी लगाती हैं। यह सभी हॉर्मोन्स के लिए है।
एलआई 4 : अंगूठा व तर्जनी उंगली की हड्डियों के मूल के मिलने वाले त्रिभुजाकार स्थान पर है। यह किसी भी तरह के दर्द व गैस दूर करने के काम भी आता है।
एलआई 11 : दोनों कुहनियों के बाहरी किनारे पर।
एच-7 : छोटी उंगली की सीध में कलाई के खत्म होते ही निचले हिस्से में।
रेन 17 : छाती पर दोनों निपल्स के बीच में।
(इसकी तस्वीर को रेन-12 के चित्र में अमेंडमेंट करके ठीक करवाकर लेना पड़ेगा इसे बनवा लें क्योंकि रेन-12 में पॉइंट पेट पर दिखा रहा है)
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